
डिजिटल डेस्क, इंदौर। रिफाइंड शुगर किसी भी मायने में फायदेमंद नहीं माना जा सकता है। मगर, बच्चों में तेजी से बढ़ती चीनी की खपत उनके भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
बच्चों को कम उम्र में ही चीनी यानी रिफाइंड शुगर देने से उनमें कई प्रकार की समस्याएं शुरू हो सकती हैं। यह उनके वयस्क होने तक गंभीर रूप ले सकती हैं।
जरूरी नहीं है मात्र रिफाइंड शुगर से ही ब्लड शुगर बढ़े। बच्चों को दिए जाने वाले तमाम फूड प्रोडक्ट्स ब्लड में तेजी से शुगर बढ़ाते हैं। इसमें पास्ता, ब्रेड, केचअप या सॉस, सलाद ड्रेसिंग, शुगर युक्त पीनट बटर और योगर्ट, कैंड सूप या ड्रिंक्स, टेट्रापैक जूस, पैकेज्ड अनाज जैसे कॉर्नफ्लेक्स, चॉकलेट वेफर आदि शामिल हैं।
इन सभी फूड्स की डिजाइनिंग इसी तरह होती है कि ये कस्टमर को आकर्षित करें। हेल्दी होने का दावा करे और फिर ढेर सारे एडिटिव और प्रिजर्वेटिव के साथ आपके बच्चे की सेहत से ये खिलवाड़ करते हैं।
इनसे शुगर एडिक्शन होता है, जिससे भविष्य में बच्चे को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसमें ब्रेन और डेवलपमेंटल डिसऑर्डर, फैटी लिवर, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज, हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर, मोटापा, अस्थमा जैसी इन्फ्लेमेटरी बीमारियां, हार्ट की समस्याएं और बौद्धिक क्षमता के विकास में कमी शामिल है।

इन सभी के साथ दांतों में सड़न और नींद न आना जैसी दिक्कतें भी शुरू हो जाती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन कहता है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिदिन 6 टेबलस्पून (25 ग्राम) से अधिक शुगर का सेवन नहीं करना चाहिए।
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन कहती है कि बच्चों को अपनी एनर्जी की जरूरत के अनुपात में 10% कम ही फ्री शुगर का सेवन करना चाहिए। फ्री शुगर फूड प्रोडक्ट्स को बनने के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाला शुगर शामिल होता है और साथ ही शहद, फ्रूट जूस आदि में मौजूद नेचुरल शुगर भी होता है।
2 साल से कम आयु के बच्चों को पूरी तरह से शुगर से बचना चाहिए। जब कम उम्र से ही शुगर युक्त फूड्स का सेवन करते हैं, तो ऐसे में हेल्दी पोषण युक्त फूड्स खाने की इच्छा खत्म हो जाती है।
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इससे शरीर में अनाज, गुड फैट, डेयरी, लीन प्रोटीन जैसी चीजें नहीं जा पाती हैं। लिहाजा, बच्चे का समुचित विकास नहीं हो पाता है। इसलिए कम उम्र से ही चीनी देना उसकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।