मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमल नाथ के साथ बिजनौर में जालसाजी, फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर 90 बीघा जमीन पर कब्जा करने की कोशिश
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की जमीन की विरासत दर्ज करने का आवेदन पांच माह तक लटका रहा।
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 07:53:00 AM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 07:55:58 AM (IST)
मध्य प्रदेश पूर्व सीएम कमल नाथ के साथ बिजनौर में जालसाजी, फाइल फोटोHighLights
- एमपी के पूर्व सीएम कमलनाथ के साथ जालसाजी
- बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील का मामला
- 90 बीघा जमीन पर कब्जा करने की गई कोशिश
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की जमीन की विरासत दर्ज करने का आवेदन पांच माह तक लटका रहा।
लेखपाल ने जांच करने की बजाय विवादित लिखकर जमीन में पेंच फंसा दिया। कमल नाथ ने बुधवार को पूर्व प्रधान धर्मपाल सिंह, जसविंदर ढिल्लो, विजय शंकर व लेखपाल डेविड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। दरअसल, कमल नाथ के पिता स्वर्गीय महेंद्रनाथ की नजीबाबाद तहसील के गांव अमी खानपुर में 90 बीघा जमीन है।
नजीबाबाद तहसील का मामला
18 मई 2026 में कमल नाथ की ओर से जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसीलदार के यहां आवेदन किया गया। इस पर लेखपाल ने भूमि विवादित लिखकर रिपोर्ट तहसीलदार के यहां प्रेषित कर दी। गांव के पूर्व प्रधान धर्मपाल सिंह की ओर से 10 अक्टूबर 1998 में बनाई फर्जी वसीयत और महेंद्रनाथ का एक मृत्यु प्रमाणपत्र तहसील कोर्ट में दाखिल किया था।
दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
अब पुलिस पूर्व मुख्यमंत्री से जमीन हड़पने की साजिश को पूरी तरह बेनकाब करने में जुटी है। फर्जीवाड़ा सामने आने पर पुलिस ने धर्मपाल और विजय शंकर को गिरफ्तार किया था। तीसरे आरोपित जसविंदर को भी हिरासत में ले लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
बटाई की आड़ में कब्जे की कोशिश
बताया गया कि पहले जसविंदर ढिल्लो इस जमीन को काफी समय से बटाई की आड़ में जोत रहा था। उसे तहसील की ओर से एक नोटिस मिला था, तब जसविंदर ने धर्मपाल से संपर्क किया। धर्मपाल ने जसविंदर और विजय शंकर से मिलकर एक फर्जी वसीयत बनवा ली।
धर्मपाल ने जमीन पर छह महीने पहले मक्का की फसल बो दी और अपना कब्जा लिया। इसी बीच भनक लगने पर पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से विरासत दर्ज करने का आवेदन किया गया। जमीन हड़पने के लिए आरोपितों ने लेखपाल डेबिड से तालमेल बैठा लिया।
अटका रहा सीएम का आवेदन
लेखपाल ने स्वर्गीय महेंद्रनाथ को दूर रहने और आवेदन करने वालों का पता अलग रहने और कब्जा आरोपित का होने का हवाला देते हुए विवाद दर्शा दिया। जिस वजह से पांच माह तक पूर्व मुख्यमंत्री का आवेदन अटका रहा। नजीबाबाद कोतवाल अमित कुमार ने कहना है कि जांच की जा रही है।
तहसील कोर्ट में दिए गए वारिसान दस्तावेज
पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से नियुक्त पैरोकार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से नजीबाबाद तहसील कोर्ट में दिए गए वारिसान प्रमाणपत्र, कमल नाथ, उनके दोनों बहनों के आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज पेश किए हैं।